दिनांक ८/४/२०२६
आज दिन के दूसरे पहर में घर से निकलना हुआ। अभी तक गर्मी की तपन महसूस नही हो रही थी। मार्च के पूरे महीने में बादलों की आवाजाही रही। अक्सर ही कड़कदार बिजली की आवाज और दूधिया रोशनी से, आकाश जगमग जगमग कर जाता था। तेज हवाएं मार्च और अप्रैल के शुरुआती महीने में खुशनुमा अंदाज में चलती रहीं। घरों के भीतर भी सिर्फ दो या तीन की स्पीड में पंखे चलते रहे।
आज जाकर महसूस हुआ कि अब इस ग़लतफ़हमी में न रहें की,ठंडी हवाओं के झोंकें आपको छूकर निकल जायेंगें। मौसम गरम हो रहा है चलते हुए एयर कंडीशनर अब, बिजली के बिल बढ़ायेंगे।
बैटरी रिक्शा का सफर करते समय एक बात का सुकून रहता है कि,रिक्शा चालक के सर पर भी मौसम की बेरुखी से बचने के लिए छत होती है। नहीं तो सामान्य रिक्शा में गर्मी ,सर्दी ,बरसात सबका सामना रिक्शा वालों को बिना छत के करना होता था। ध्यान से अपने आसपास देखने पर हवा में धूल के कण तो घुले मिले दिखते हैं ,इसकेअलावा पॉलिन ग्रेंस भी हवा के साथ नजर आते हैं। पेड़ों और झाड़ियां से झड़ते हुए फूल एलर्जी वालों की समस्या को बढ़ा जाते हैं।

मेरे विचार से इस समस्या से निपटने का केवल एक ही उपाय है ,मास्क लगाइए और घर से बाहर अपने कदम को बढ़ाइये। गर्मी का महीना थोड़ा कष्ट देने वाला तो होता ही है, बाहर की तपन में इंसान अंदर की शीतलता को खोता सा महसूस करता है। उससे बचने के तमाम देशी उपाय हैं। तरबूज ,खरबूज ,नारियल पानी,नींबू पानी शरीर को शीतल रखने के आसान उपाय हैं। खाना तो ताजा और हल्का खाइये ,शरीर की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को दूर भगाइए।
कहते हैं व्यक्ति का सिर और तलवा एनर्जी के द्वार होते हैं। गर्मी के मौसम में सर को ढकना चाहिए। दुपट्टा ,टोपी ,अंगोछा की सहायता से गर्म हवा से बचाव होता है। तलवे को शीतल रखने के लिए हवादार फुटवियर और कॉटन के मोज़े पहनने चाहिए ,जो पसीने को आसानी से सोख सके। समय-समय पर पांव को ठंडे पानी से धोने से व्यक्ति ! खुद को ऊर्जावान महसूस करता है।
दोपहर में घर वापस लौटते समय कुछ दूर पर चलते ही गर्मी की तपन ने मुझे वापस रिक्शा पर बैठने को मजबूर कर दिया। गर्मी और पसीने से लड़ते हुए स्कूल कॉलेज के बच्चे दिखे ,गन्ने का जूस पीते हुए युवा दिखे। नारियल पानी के स्टॉल पर खड़े हुए अपनी बारी का इंतजार करते हुए लोग दिखे।
गर्मी में भी चाय की गुमटी पर चाय उबल रही थी। बोइलिंग पॉइंट पर चाय को उबलते देख ,चाय पीकर ताजगी महसूस करने वाले लोगों के चेहरे खिल गए। मुझे थोड़ी ज्यादा ही गर्मी लगने लगी ,तभी खरबूजे के ठेले को धक्का मार कर आगे बढ़ता हुआ खरबूजे वाला दिखा ,मेरे अंदर की गर्मी के मौसम में अनुशासन रखने वाली ग्रहणी को जगाता चला गया। खरबूजे के रूप में हमें तमाम इलेक्ट्रोलाइट्स का खजाना मिल गया।
खरबूजे की शॉपिंग करके हम अपनी सोसाइटी के गेट के भीतर घुसे। बाहर की तुलना में अंदर हरियाली के कारण तापमान कम था। अपने माथे से पसीने की बूंद को पोछते हुए घर के भीतर प्रवेश किये ,शीतलता और बढ़ गई। मन ने बहुत तेजी से खुद से सवाल किया। गर्मी की ऋतु इतनी कष्टदायक क्यों होती है ? ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में हमारा क्या योगदान है ? विकसित देशों द्वारा हथियारों का ताबड़तोड़ उपयोग ,गर्मी की ऋतु को लंबा खींचने में अपना योगदान नहीं देगा क्या ?
ऋतुएँ आती और जाती रहती हैं ,लेकिन गर्मी के मौसम में हर साल बढ़ता हुआ तापमान कष्ट देने वाला होता है। अभी तो शुरुआत है, मई – जून की दोपहर और जुलाई अगस्त की चिपचिपी गर्मी भी अभी सताएगी। बरसात की बूंदें क्या सही समय पर झूम-झूम कर अपने गीत गायेंगी ? या फिर वही ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में बदलाव की बात सामने आयेगी।