यह समय बदलाव का है ,मौसम के बदलाव का। धीरे -धीरे सर्दी के आने की आहट तो है लेकिन, मानसून के बादलों को अपनी वापसी शायद भा नही रही है।मौसम विभाग के अनुसार सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है लेकिन ,अभी भी यदाकदा आकाश से बूंदों का गिरना जारी है। पहले और अब में बदलाव बस इतना रहा है की ,पहले बारिश के बाद उमस वाली गर्मी हो जाती थी लेकिन अब, बारिश के बाद पंखे की रफ़्तार कम करना पड़ता है क्योंकी सर्दी की सिरहन महसूस होती है।
खेतों से धान की फसल के कटने का समय पास आ रहा है। बरसात के कारण किसानों की खड़ी फसल को नुकसान अधिक झेलना पड़ा है। पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा के चाँद को देखने के लिए आकाश के हर कोने पर नजर फेर लिया कहीं नजर नहीं आया। कहते हैं की शरद पूर्णिमा के चाँद की किरणें ,सकारात्मक ऊर्जा के साथ समृद्धि और वैभव भी लेकर आती हैं। गाय के दूध से बनी हुई खीर में जब चाँद की किरणें प्रवेश करती हैं तब वह खीर अमृत बन जाती है।
आकाश में चाँद के न दिखने पर ज़रा सी निराशा तो हुई लेकिन ,चंचल किरणों ने बादलों के पीछे से निकलकर खीर के कटोरे में प्रवेश तो कर ही लिया होगा ,यह विश्वास मजबूत था। सही जगह पर खीर के बर्तन को रखकर हम भी निश्चिंत होकर सो गए। कमरे की खिड़की से देखा तो बादलों और चन्द्रमा की दूधिया किरणों के बीच लुकाछिपी का खेल जारी था।
ये वापस लौटते हुए मानसून के बादळ भी उद्दंड बालकों सा ही व्यहवार करते हैं। मानव मन की उलझनों को बढाते ही जाते हैं।
आने वाले दिन त्योहारों की भीड़ के साथ आ रहे हैं। उत्साह को वातावरण में महसूस किया जा सकता है। सबसे ज्यादा रौनक बाजार और मॉल में नजर आ रही है। चाँद के महत्त्व को बताने वाला ,चाँद की पूजा के बगैर संपन्न न होने वाला सुहागिनों का करवा चौथ अभी गया है।
करवा चौथ एक ऐसा व्रत जिसने भारतीय सिनेमा के माध्यम से ,अपनी धाक सुहागिन महिलाओं और युवतियों के भीतर जगाई। महिलाओं का साज श्रृंगार इस अवसर पर भरपूर दिखता है। पूरे दिन का बिना पानी का व्रत और चाँद दिखने के बाद मनपसंद का खाना खाना ,श्रृंगार के बाद का सबसे बड़ा आकर्षण होता है।
कहते हैं परम्पराएं आधुनिकता के पीछे छिप जाती हैं और धीरे-धीरे ओझल हो जाती हैं। लेकिन आधुनिक जीवन के यंत्र फ़िल्में ,टेलीविज़न,मोबाइल और सोशल मीडिया हमारी परम्पराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसका सबसे बेहतर उदाहरण करवा चौथ का व्रत रहा है जिसने आधुनिक सिनेमा के माध्यम से युवाओं को आकर्षित किया है।
धीरे धीरे चाँद के आकार में परिवर्तन दिख रहा है। शरद पूर्णिमा का चाँद अपने पूर्ण गोल आकार के साथ आकाश में दिखता है तो करवा चौथ का चाँद घटे हुए आकार के साथ लालिमा ओढ़े हुए दिखता है। अमावस की रात दीपों का त्यौहार लेकर आएगी। घनी काली रात में दीपों की रौशनी एक नई ऊर्जा के साथ टिमटिमायेगी।
बदलाव सिर्फ मौसम का ही नहीं होता है ,बदलाव होता है समाज में भी। हमारे व्यहवार हमारे आचरण में भी ,अपनी परम्पराओं और संस्कार को बदलते हुए समय में भी बचाने में।
बदलाव प्रकृति का नियम है ,चाँद के आकार में ,हवा की बयार में ,मौसम के बदलाव में।