भारतीय परिवार ! जहाँ दूध वाली चाय रोजमर्रा के जीवन में घुलमिल चुकी है ,आजकल स्वास्थ की अदालत में कटघरे में खड़ी नजर आती है।
सामाजिक जीवन जीते हुए ,लोक व्यहवार निभाते हुए चाय से हमारा भी ज़रा सा अपनापन है। पैदाइशी चाय पीने का शौक रहा हो ऐसा भी नहीं है। कहते हैं संगत का असर पड़ता है ,और दूध वाली चाय पीना बुरा भी नही है। इसी सोच ने शायद चाय का साथ कर दिया।
ट्रे में जुड़वा कप लेकर चलने से चाय पीने की आदत पड़ी ,भले एक कप पूरा भरा हो और दूसरे में मात्रा कम हो। धीरे- धीरे सुबह शाम की आदत में शुमार हो गयी।

आजकल महानगरों और नगरों मे चाय की सजी -धजी दुकानें देखने को मिल जाती हैं। घर की तुलना मे इन कैफ़े मे बैठकर चाय पीना पॉकेट को थोड़ा हल्का तो करता है लेकिन, इन जगहों की अपनी वाइब्स होती है। इसी अनुभूति को पाने के लिए ,सुकून के साथ समय बिताने के लिए शहरों मे लोग इन कैफ़े मे अपना क़्वालिटी टाइम बिताते हैं। स्नैक्स के अलावा भरपेट खाने के विकल्प भी यहाँ पर होते हैं। वर्क फ्रॉम होम करने वाले लोग भी इन जगहों पर , लैपटॉप के साथ काम में तल्लीन नजर आते हैं।
बात अगर करो चाय के स्वाद और स्वास्थ्य की तो, मात्रा और कप की संख्या जरूर स्वास्थ्य पर असर डालती है।चाय पीने का मजा तब तक नहीं आता, जब तक उसमें से अदरक और इलायची की खुशबू न आए। दूध का गाढ़ापन और चाय का कसैलापन दोनों अपनी प्रभुता चाय के स्वाद में दिखाएं।
चाय की पत्ती की खरीदारी करते समय ग्रीन टी के पैकेट की तरफ नजर फिर गई। जहां एक तरफ सामान्य चाय के पैकेट में चाय के कप में से धुआं उठता हुआ दिख रहा था। तस्वीर को देखकर ही चाय का बेहतरीन स्वाद मुंह में घुल रहा था। चाय की खुशबू मन मस्तिष्क को ताजा कर रही थी ।
ग्रीन टी के पैकेट में कमर के घेरे को कम दिखाते हुए इंच टेप नजर आया। ग्रीन टी के पैकेट ने हमारी कमजोर नब्ज को जोर से दबाया। मोटापा कम करना है तो ग्रीन टी को अपने रोजमर्रा के जीवन में शामिल करिए।तो क्या स्वास्थ्य के कटघरे में दूध वाली चाय सही में खड़ी है ? लेकिन सामाजिक लोकाचार निभाने मे ,नॉन एल्कोहलिक ड्रिंक में तो दूध वाली चाय सबसे आगे खड़ी है।
दूध वाली चाय से स्वास्थ्य लाभ की तरफ नज़र फेरिये तो ,
हड्डियों और दातों की मजबूती की बात सामने आती है दूध वाली चाय से दांतों को मजबूती मिलती है। इसमें डाले जाने वाले दूध से कैल्शियम और विटामिन डी मिलता है जो ,ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से दूर रखता है।
एनर्जी और फोकस को बढ़ाने में दूध वाली चाय मदद करती है,एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण उपयोगी होती है। तनाव को कम करती है ,यहाँ तक की पाचन को बेहतर करती है।
अच्छे स्वास्थ के लिए तैयार चाय के कप मे, शुगर की मात्रा या तो बहुत कम होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए। फुल क्रीम दूध की जगह लाइट मिल्क का उपयोग होना चाहिए। दालचीनी ,कालीमिर्च ,अदरक ,इलाइची जैसे मसालों का उपयोग चाय मे कर के ,हम इसे स्वास्थ के लिए उपयोगी बना सकते हैं।
दिमाग ने हमे समझाया ,समस्या अति से ही पैदा होती है। इसीलिए तो यह मन्त्र हमेशा काम आया है “अति सर्वत्र वर्जयेत ” ने समय -समय पर सही राह दिखाया है।