Daily LifeShort Stories हस्ताक्षर by 2974shikhat October 22, 2018 by 2974shikhat October 22, 2018 अनुपस्थित रहकर भी जो व्यक्ति की उपस्थिति बता जाता है । हस्तलिखित हस्ताक्षर ही तो होता है जो व्यक्ति की पहचान बता जाता है । व्यक्ति का व्यक्तित्व भी हस्ताक्षर समान ही होता है । व्यक्तित्व भी अपनी अमिट छाप मन मस्तिष्क पर छोड़ जाता है । अक्षरों से सजा हुआ हस्ताक्षर रोचक सा लगता है । मानो या न मानो हस्ताक्षर भी एक कला है । वर्तमान मे कामकाज का दौर हो या शिक्षा की सीढ़ियों पर चढ़ता हुआ बच्चा हो या युवा हो । हस्ताक्षर के साथ अपनी पहचान बता पाता है । सही हस्ताक्षर न मिलने पर व्यक्ति बैंकों और कार्यालयों के भीतर हैरान परेशान सा नज़र आता है । किसी ने हस्ताक्षर मे अपना पूरा नाम ही लिख लिया । किसी ने माँ पिता के नाम के अक्षरों को भी स्थान दिया । किसी ने अपने गांव या शहर के अक्षर को भी सम्मान दिया । किसी ने एक या दो अक्षरों से ही काम चला लिया । किसी ने बिंदु या लाइनो से हस्ताक्षर को सजा लिया । किसी ने अंतिम अक्षर को दूर तक खींच डाला । किसी ने अक्षरों को आपस मे ही उलझा दिया । किसी ने “बूझो तो जाने”वाले अंदाज मे हस्ताक्षर कर डाला । अनजाने मे ही व्यक्ति हस्ताक्षर के माध्यम से अपने व्यक्तित्व की बारीकियों को बता देता है । व्यक्ति की शारीरिक भाषा,सदियों से व्यहवार को बताने का जरिया होती थी । उसी क्रम मे अब हस्ताक्षर भी जुड़ा हुआ नज़र आता है । अशिक्षित समाज मे अंगूठा लगाना हस्ताक्षर करने का एक सरल तरीका होता था, और होता है । शिक्षित समाज हस्ताक्षर को हमेशा से महत्व देता हुआ दिखता है । लेकिन विकास के साथ, तकनीकि के इस दौर मे अंगूठे की छाप और,आँखों का रंग ही सबसे विश्वसनीय हस्ताक्षर नज़र आते हैं । लेकिन फिर भी,हस्तलिखित हस्ताक्षर का अंदाज निराला होता है । ध्यान से देखो अगर हस्ताक्षर को तो हर अक्षर,बिंदु,लाइन ,यहाँ तक कि स्याही भी अपने रोचक अंदाज मे बोलती नज़र आती है । Human behaviorSignatureThoughts 0 comment 0 FacebookTwitterPinterestEmail 2974shikhat previous post “सुरक्षा ” यानी, मै से हम के कदम next post “इतिहास”,मतों का संघर्ष You may also like अमरूद का वो पेड़ April 30, 2026 और कुहासा बह गया February 24, 2026 पूर्णिमा से अमावस्या तक का चक्र October 14, 2025 हे माँ October 2, 2025 लीची का पेड़ June 18, 2025 कथा महाशिवरात्रि की February 25, 2025 माँ अब नही रहीं February 13, 2025 सैरऔर चिर परिचित चेहरे February 4, 2025 बदलेगा क्या हमारा शहर ? January 23, 2025 समझो तो पंक्षी न समझो तो प्रकृति October 26, 2024