Daily LifePoems विषय विचार शब्द और कलम by 2974shikhat November 9, 2018 by 2974shikhat November 9, 2018 रचनाकार का मन भी समय -समय पर दिमाग से उलझता रहता है…… अलग-अलग प्रकार की रचनाओं को बुनता रहता है…. कभी तो मन दार्शनिक हो चला अपने ही अंदाज मे ज्ञान विज्ञान की बातों को उगलता हुआ दिखा….. मन की स्थिति को समझकर कलम ने हौले से शब्दों को चुना…. जीवन की उलझनें तमाम पहेलियाँ…… चिंता और परेशानियों के साथ दुखों की सहेलियाँ….. वहीं कभी उमंग,उल्लास और विश्वास के साथ सुखों की सहेलियाँ साथ हो चलीं ….. जीवन के समंदर मे गोता लगाते हुए तत्परता से दिखीं….. कलम भी रचनाकार के,मन और दिमाग को समझ रही थी…. सरपट भागने की जगह सँभल सँभल कर शब्दों को चुन रही थी…. था शायद! आते हुए सर्द मौसम का असर….. आकाश के साथ-साथ धरा पर भी दिख रहा था आलस्य…… कलम की गति पर भी पड़ रहा था सर्द मौसम का असर…… कलम ने रचनाकार को ज़रा प्यार से समझाया…. विचारों की कभी टूटती तो कभी जुड़ती हुयी श्रृंखला से अवगत कराया….. होते नहीं विषयवस्तु ,शब्द और विचार हर दिन एक समान …. विचारों के तरकश मे होते हैं कभी शब्द तीर समान…. कभी होते हैं फूलों की बगिया मे लगे हुये फूल समान…… कभी होते हैं ‘इंद्रधनुषी’आकाश के समान… हर रंग और विचारों का अद्भुत सा साथ….. कभी होते हैं स्याह काले आकाश के भीतर चाँद और तारों की चमक के समान….. कभी धुप्प अँधियारे मे धरा पर ही ‘जुगनुओं’ से विचारों का साथ मिल जाता है…… तो कभी अँधेरों के बीच मे जलता हुआ ‘दिया’ विचारों को रोशन कर जाता है….. कलम का हौसला और विश्वास शब्दों मे झलक रहा था……. एक बार फिर से रचनाकार का हौसला और खुद पर विश्वास बढ़ रहा था….. पकड़ लिया एक बार फिर से कलम ने अपनी गति को……. तीव्रता से कागज पर सरकती जा रही थी….. पता नही था रचनाकार को, कि लेखन की विधा मे ! कविता थी कहानी थी…… या लेख ही बुने जा रही थी…….. Expressionfeelings of positivityHard workinspirationPen and paperStruggleSuccessThoughtsWill powerWriting 0 comment 0 FacebookTwitterPinterestEmail 2974shikhat previous post विकास,आकाश और जमीं के साथ next post “बेटियाँ”पिता के मस्तक का अभिमान You may also like अमरूद का वो पेड़ April 30, 2026 और कुहासा बह गया February 24, 2026 पूर्णिमा से अमावस्या तक का चक्र October 14, 2025 हे माँ October 2, 2025 लीची का पेड़ June 18, 2025 माँ अब नही रहीं February 13, 2025 सैरऔर चिर परिचित चेहरे February 4, 2025 बदलेगा क्या हमारा शहर ? January 23, 2025 पुस्तकालय August 10, 2024 बातें गुलाबी जाड़ा के साथ December 13, 2023